पटना में ऑनलाइन शादी के बाद विवाद, दहेज और उत्पीड़न के आरोपों से महिला आयोग तक पहुंचा मामला
- 25 लाख रुपये की मांग और मारपीट का आरोप, पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई
- पति ने आरोपों को बताया निराधार, पारिवारिक विवाद को बताया कारण
पटना। राजधानी पटना के पीरबहोर थाना क्षेत्र से एक दंपति विवाद का मामला सामने आया है, जो अब बिहार राज्य महिला आयोग तक पहुंच गया है। ऑनलाइन वैवाहिक मंच के जरिए हुई इस शादी के बाद महिला ने अपने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि शादी के बाद उसे घर में रखने के बजाय किराए के मकान में रखा गया और कुछ ही महीनों के भीतर उस पर मायके से 25 लाख रुपये लाने का दबाव बनाया जाने लगा। महिला ने आयोग को दिए गए अपने आवेदन में बताया कि शादी के लगभग दो महीने बाद उसके ससुराल वाले उस पर आर्थिक दबाव बनाने लगे। उसका आरोप है कि पति, सास और ससुर मिलकर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। उसने यह भी कहा कि उसके साथ मारपीट की गई और अपमानजनक व्यवहार किया गया। महिला के अनुसार, जब उसने इस मांग का विरोध किया तो उसके साथ और अधिक दुर्व्यवहार होने लगा। पीड़िता ने आगे बताया कि दिसंबर 2024 में वह गर्भवती हुई, जिसके बाद उसके ससुराल पक्ष के लोगों ने उस पर भ्रूण की जांच करवाने का दबाव बनाया। उसका आरोप है कि परिवार में बेटे की चाहत के कारण उस पर यह अमानवीय दबाव डाला गया, जिसे उसने ठुकरा दिया। इसके बाद उसकी स्थिति और भी खराब हो गई और उसे खर्च तक के लिए पैसे नहीं दिए जाते थे। अपनी खराब हालत की जानकारी महिला ने अपने मायके वालों को दी, जिसके बाद उसके परिवार ने उसे अपने पास बुला लिया। उसने बताया कि इस दौरान उसके ससुराल पक्ष के किसी भी सदस्य ने उसकी कोई खबर नहीं ली। सितंबर 2025 में उसने एक बेटी को जन्म दिया। बाद में नवंबर 2025 में जब वह अपनी बच्ची के साथ ससुराल पहुंची, तो उसे घर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। महिला ने बताया कि उसने तत्काल आपात सेवा नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और समझाने का प्रयास किया, लेकिन ससुराल पक्ष ने उसे बाद में बुलाने की बात कही। इसके बाद उसे कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसमें तलाक की बात कही गई थी। दूसरी ओर, पति ने महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। उसका कहना है कि शादी के बाद उसने अपनी पत्नी को सम्मान दिया और परिवार से परिचित कराया। पति का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी के व्यवहार में बदलाव आ गया और वह परिवार के सदस्यों के साथ विवाद करने लगी। उसने यह भी कहा कि पत्नी अक्सर बिना बताए मायके चली जाती थी और संयुक्त परिवार में रहने को तैयार नहीं थी। पति के अनुसार, उसकी पत्नी संपत्ति में हिस्सा लेकर अलग रहने की इच्छा रखती है। उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने बच्ची को अस्पताल में छोड़ दिया था और बाद में कई बार विवाद की स्थिति पैदा की। पति का कहना है कि उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया, जिसके कारण उसे पुलिस थाने में भी समय बिताना पड़ा। इस पूरे मामले पर बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रोफेसर अप्सरा ने कहा कि यह एक पारिवारिक विवाद का मामला है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य की कमी साफ दिखती है। उन्होंने बताया कि फिलहाल महिला अपने मायके में रह रही है और बच्ची की परवरिश परिवार द्वारा की जा रही है। आयोग का कहना है कि उनकी प्राथमिकता दोनों पक्षों के बीच सुलह कराना और परिवार को फिर से बसाना है। पीड़िता भी समझौते के पक्ष में है और अपने पति के साथ रहना चाहती है। ऐसे में आयोग इस मामले में मध्यस्थता कर समाधान निकालने का प्रयास करेगा। यह मामला आधुनिक ऑनलाइन विवाह के बाद उत्पन्न होने वाली पारिवारिक जटिलताओं और सामाजिक चुनौतियों को उजागर करता है, जहां आपसी समझ और विश्वास की कमी गंभीर विवाद का कारण बन जाती है।


