वैशाली में 7 वर्षीय बच्ची के साथ हैवानियत, चाचा ने भतीजी का किया रेप, आरोपी की तलाश जारी
वैशाली। वैशाली जिले के बलीगांव थाना क्षेत्र में एक हैवानियत भरी घटना सामने आई है, जहाँ एक 40 वर्षीय चाचा ने अपनी ही 7 वर्षीय भतीजी के साथ दुष्कर्म किया। यह घटना गुरुवार शाम को घटी, जब बच्ची बिस्कुट खरीदने के लिए घर से दस रुपए लेकर निकली थी। पास की दुकान पर जाते समय आरोपी चाचा ने उसका मुँह दबाकर मक्के के खेत में ले जाकर उसके साथ यौन हिंसा की। घटना के बाद आरोपी ने बच्ची का मोबाइल फेंक दिया, जिससे वह मदद के लिए किसी को आवाज नहीं दे सकी। जब बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिवार वालों ने उसकी तलाश शुरू की। उन्होंने बच्ची के मोबाइल पर लगभग 100 बार कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार, मक्के के खेत से मोबाइल की रिंगटोन सुनाई दी, जहाँ आरोपी ने परिवार वालों को खेत में आने से रोकने की कोशिश की। हालाँकि, बाद में उसने मोबाइल वापस कर दिया। जब बच्ची के चाचा और पिता खेत में पहुँचे, तो वह पहले तो डर गई, लेकिन चाचा की आवाज पहचानकर उससे लिपट गई। बच्ची के शरीर पर चोट के निशान थे, उसके निजी अंगों से खून बह रहा था और गले पर नील के निशान दिखाई दे रहे थे। उसे तुरंत पातेपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए हाजीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में बच्ची का इलाज चल रहा है, लेकिन वह अभी भी सदमे में है और ठीक से बोल नहीं पा रही है। आरोपी की पहचान लालबाबू राम के रूप में हुई है, जो घटना के बाद फरार हो गया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। बलीगांव थानाध्यक्ष डीके महतो ने बताया कि पुलिस मामले की गहन जाँच कर रही है और आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ने की कोशिश की जा रही है। यह घटना न केवल वैशाली, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि कैसे कोई व्यक्ति इतनी निर्ममता से एक मासूम बच्ची के साथ ऐसा जघन्य अपराध कर सकता है। बच्चियों की सुरक्षा और उनके प्रति बढ़ते अपराधों पर कड़े कानूनी कार्रवाई की जरूरत है। साथ ही, समाज को भी ऐसे मामलों में जागरूक होकर पीड़ितों का साथ देना चाहिए। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी जरूरी है, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके। साथ ही, बच्ची के मानसिक और शारीरिक उपचार पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ऐसी घटनाएँ समाज को हिला देती हैं और यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या हम वाकई सुरक्षित हैं?


