मिडिल ईस्ट संकट के बीच बिहार सरकार सतर्क, प्रवासी मजदूरों के लिए हेल्पलाइन जारी

  • राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित, फंसे श्रमिक सीधे कर सकेंगे संपर्क
  • खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों बिहारी मजदूरों की सुरक्षा पर सरकार की नजर

पटना। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए वहां फंसे प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए विशेष व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है और राज्य स्तर पर एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, ताकि जरूरतमंद लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। यह निर्णय सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित संकट प्रबंधन समूह की बैठक में लिया गया। बैठक में मध्य पूर्व की बिगड़ती स्थिति और वहां काम कर रहे बिहार के मजदूरों की सुरक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद श्रम संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया कि वह तत्काल प्रभाव से सहायता प्रणाली तैयार करे। श्रम संसाधन विभाग द्वारा स्थापित नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर 0612-2520053 और संदेश अनुप्रयोग नंबर 7368855002 जारी किया गया है। इन नंबरों पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो चौबीसों घंटे सहायता प्रदान करेंगे। मध्य पूर्व या अन्य क्षेत्रों में फंसे श्रमिक इन नंबरों पर संपर्क कर अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में प्रवासी मजदूर सीधे इन माध्यमों से संपर्क करें, ताकि प्रशासन त्वरित कार्रवाई कर सके। राज्य सरकार का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव मदद पहुंचाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस समय मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है और स्थिति एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर बढ़ती नजर आ रही है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को सख्त चेतावनी दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यदि वह शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमत नहीं होता, तो उसके बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव का असर वहां काम कर रहे भारतीयों, विशेषकर बिहार के मजदूरों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब दो लाख से अधिक बिहारी मजदूर खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। अचानक बढ़े तनाव के कारण इनमें से कई मजदूर भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं। कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि दुबई और ओमान जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षा कारणों से कंपनियों ने अपने कमरों में ही रहने का निर्देश दिया है। पूर्णिया जिले के लगभग दस मजदूर दुबई में फंसे हुए हैं और उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। वहीं सीवान और बेगूसराय के कई मजदूर बमबारी और मिसाइल हमलों के खतरे के बीच बंकरों या सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए बिहार सरकार ने त्वरित कदम उठाया है, ताकि जरूरत पड़ने पर मजदूरों को राहत और सहायता दी जा सके। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यदि स्थिति और गंभीर होती है, तो केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। बिहार सरकार की यह पहल संकट की इस घड़ी में प्रवासी मजदूरों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकती है। प्रशासन की कोशिश है कि हर जरूरतमंद तक समय पर मदद पहुंचे और किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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