पटना में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, तीन घंटे में कमाई और सस्ते ऋण का झांसा देकर लोगों को बनाते थे शिकार

  • बेउर के फ्लैट से तीन आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल, लैपटॉप और दस्तावेज बरामद
  • सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन से ठगी, नकली खातों के जरिए करोड़ों के नेटवर्क का अंदेशा

पटना। राजधानी पटना में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जहां तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को झांसा देकर ठगी करते थे और आकर्षक ऑफर दिखाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस ने बेउर क्षेत्र स्थित एक फ्लैट में छापेमारी कर नवादा निवासी गुलशन राज, शुभम और विक्की कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन डालकर लोगों को ठगने का काम करता था। इन विज्ञापनों में दावा किया जाता था कि मात्र तीन घंटे की सेवा देकर 20 हजार रुपये तक की कमाई की जा सकती है। जो लोग इस झांसे में आते थे, उनसे पंजीकरण शुल्क, मसाज किट, पहचान पत्र और अन्य सेवाओं के नाम पर पैसे वसूले जाते थे। इसके बाद आरोपियों द्वारा उनका नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था और संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता था। इस तरह लोगों से छोटी-छोटी रकम लेकर बड़े स्तर पर ठगी की जा रही थी। इसके अलावा यह गिरोह फर्जी वित्तीय सेवा के नाम पर भी लोगों को ठगता था। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर दावा किया जाता था कि मात्र 5 हजार रुपये की फीस देकर 10 लाख रुपये तक का ऋण प्राप्त किया जा सकता है। इस लालच में फंसने वाले लोगों से विभिन्न प्रकार की फीस और कर के नाम पर पैसे वसूले जाते थे। उन्हें ऋण स्वीकृति के फर्जी दस्तावेज भी भेजे जाते थे, जिससे वे ठगी का शिकार हो जाते थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का सरगना गुलशन राज है, जो इंटरमीडिएट तक पढ़ा है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पटना आया था। कुछ वर्ष पहले वह स्वयं साइबर ठगी का शिकार हुआ था, जिसके बाद उसने इंटरनेट के माध्यम से इस तरह की ठगी के तरीके सीखे और अपने साथियों के साथ मिलकर गिरोह बना लिया। गिरोह की कार्यप्रणाली भी काफी सुनियोजित थी। आरोपी लोगों को पंजीकरण के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन फाइल का लिंक भेजते थे, जिसमें उनसे व्यक्तिगत जानकारी भरने को कहा जाता था। इसके बाद नाममात्र का शुल्क लिया जाता था, लेकिन उसी प्रक्रिया के माध्यम से उनका पूरा डाटा गिरोह के पास पहुंच जाता था। इसके बाद आरोपी उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह नकली बैंक खातों का उपयोग करता था, जिन्हें फर्जी नाम और पते पर खोला जाता था। इन खातों को उपलब्ध कराने के लिए अलग से एक नेटवर्क काम करता था, जिसे कमीशन दिया जाता था। इन्हीं खातों में ठगी की राशि जमा कराई जाती थी, जिससे आरोपियों की पहचान छिपी रहती थी। पुलिस ने ऐसे पांच से छह लोगों की पहचान की है, जो इन नकली खातों की व्यवस्था करते थे। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क का दायरा बड़ा हो सकता है और जांच के दौरान और भी खुलासे होने की संभावना है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के आकर्षक ऑफरों से सावधान रहें और किसी भी अनजान लिंक या विज्ञापन पर भरोसा न करें। साथ ही, किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इन अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

You may have missed