भाई-बहन का प्यार, खुशियां अपरंपार, रक्षाबंधन की त्योहार को लेकर सज गयी है दुकानें
पटना(पालीगंज)।आनेवाले गुरुवार (15 अगस्त) को रक्षाबंधन व स्वतंत्रता दिवस का त्योहार है। एक ओर स्वतंत्रता दिवस रूपी पर्व को मनाने के लिए कार्यालयों की सजावट की जा रही है तो दूसरी ओर रक्षाबंधन की त्योहार को लेकर पालीगंज के सभी चौक चौराहों पर राखीयो की अनेको दुकाने रंग बिरंगी राखियो से सज गयी है। भाई के लिए राखियां खरीदने के लिए बहनों की भीड़ दुकानों पर उमड़ पड़ी है।वही दुकानो में एक रुपये से लेकर दो सौ रुपये तक कि राखियां सजी हुई है। उन दुकानों पर बिभिन्न प्रकार के चाइनीज राखियां भी अपने जलवे दिखला रहा है। ये रंग बिरंगे राखियां सभी खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। कुछ राखियां छोटी है तो कुछ आकार में बड़ी है। वही सभी बहने अपनी क्षमता के अनुसार भाई के लिए सस्ती व महंगी राखियां खरीद रही है। साथ ही सभी बहने रोड़ी चंदन के अलावे भाई की आरती उतारने के लिए अन्य सामग्री खरीद रही है।

वही राखी बिक्रेता रोहित कुमार व राहुल कुमार कहता है कि राखी की खरीदारी 15 दिनों पूर्व से चल रही है। कुछ बहने राखियां खरीदकर दूर दराज में नौकरी कर रहे अपने भाइयों को डांक द्वारा भेज दी है। राखी बिक्रेता शशिकांत सिंह ने बताया कि इस वर्ष राखी खरीदने दुकान पर आई कुछ लड़कियों ने बताई की मैं कुछ राखियां उन फौजी भाइयों के नाम से रजिस्ट्री कर रही हूं जो जान पर खेलकर हम मां – बहनों की हिफाजत के लिए सिमा पर तैनात है।
वही राखी खरीदने 10 किलोमीटर दूरी तय कर मेरा गांव से पालीगंज आयी ज्योति कुमारी ने बताई की मेरी शादी औरंगाबाद जिले में हुई है। लेकिन भाई का प्रेम मुझे प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के दिन मैके में खींच लाती है। वही धरहरा गांव की अनुपम व रिंकू ने बताई की रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधकर भगवान से भाई की सलामती की दुआ मांगती हूँ।
राखी बांधने का प्रचलन:- राखी बांधने का प्रचलन युगों युगों से चली आ रही है। धार्मिक गर्न्थो में वर्णित कथाओं के अनुसार त्रेता युग के महाभारत काल के समय जब भगवान कृष्ण ने अधर्मी शिशुपाल का बध किया था तो उस समय कृष्ण की उंगली चक्र से कट गयी थी जिससे रक्त निकल रहा था। जिसे देख द्रौपदी ने अपना पल्लू फाड़ कृष्णा के अंगुली से बहती रक्त को रोक दी थी। तबसे कृष्णा ने द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार किया था। जिसकी लाज कृष्णा ने चिर हरण के दौरान हस्तिनापुर की राजसभा में बचाई थी।
वही भारतीय इतिहास में वर्णित कथाओं के अनुसार गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चितौड़ पर आक्रमण किया था तो चितौड़ के राजपूत राजा की बिधवा रानी कर्णावती अपने आपको असहाय पाकर दिल्ली के सुल्तान हुमायूं को राखी भेजकर सहायता मांगी थी। वही हुमायूं ने भी रानी कर्णावती को बहन स्वीकार कर अपनी सेना भेज उसकी रक्षा किया था। उसी समय से सभी बहन अपनी भाई की कलाई पर राखी बांधती है व भगवान से अपने भाई की सलामती की दुआ मांगती है। वही भाई भी अपनी बहन की रक्षा का प्रण लेता है। यह भाई बहन के बीच श्रद्धा व प्रेम का त्योहार है जिसे भारत के अलावे अन्य कई देशों में मनाई जाती है।

