EXCLUSIVE वीडियो: बाढ़ में स्वच्छता अभियान की खुली पोल; लाखों का बंदरबांट

बाढ़। एक और  केंद्र  व  राज्य सरकार  लोगों को  स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए करोड़ों रुपया खर्च कर अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ प्रखंड के राणा विघा पंचायत में भारत सरकार के स्वच्छता अभियान की हवा निकल रही है या कहें कि हवा निकल चुकी है। केंद्र सरकार ने शौचालय का निर्माण हर राज्य के हर गाँव-घर में बनाने का आह्वान किया है और इसके एवज में केंद्र व राज्य सरकार राशि भी गृह स्वामियों को मुहैया करा रही है परंतु राजधानी पटना से तकरीबन 70 किलोमीटर दूरी पर बसे बाढ़ के राणा विघा गाँव में 2011-12 से 2013 तक अपने-अपने घर में ग्रामीणों  ने अपने-अपने खर्च से शौचालय बनाए। लोगों से कहा गया कि जब राशि आएगी तो आप लोगों को मिल जायेगा।

इस गाँव के लोग मुखिया एवं बाढ़ प्रखंड के बीडीओ कार्यालय तक दौर लगाते रहे, लेकिन अभी तक लाभुकों को पैसा नहीं मिला है। जब हमारे संवाददाता ने उस गांव का दौरा  किया तो असलियत सामने आई। गाँव के ज्यादा लोगों ने एक ही बात कहा कि शौचालय का एक पैसा नहीं मिला। पैसा मिलने पर शौचालय में दरवाजा एवं नल लगवाएंगे। दूसरी ओर राणा विघा गाँव के निवासी शिवशंकर प्रसाद ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक आवेदन पत्र दिया है कि मेरे नाम से पैसा किसी अन्य लोग ने उठा लिया है, जबकि मैं योजना का एक भी पैसा नहीं लिया हूं। पैसा लाभार्थी के खाता में आना चाहिए था लेकिन बिना खाते में आए कैसे कोई दूसरा आदमी पैसा उठा लिया। इसकी जाँच होनी चाहिए।

बहरहाल बिहार में स्वच्छता अभियान की पोल आए दिन खुल रही है। शौचालय न रहने के कारण ग्रामीण खेतों व सड़कों के किनारे शौच करने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार की योजना का लाभ आम लोगों की बजाए बिचौलिए उठा रहे हैं, वही अधिकारी इतनी बड़ी राशि का बंदरबांट होने के बावजूद गहरी नींद में सोए हुए हैं। देखना दिलचस्प होगा कि उक्त योजना में किए गए लाखों-करोड़ों रुपए के बंदरबांट की जांच के लिए राज्य सरकार कदम उठाती है या नहीं।

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