रात बारह बजे अवतरित हुए प्रभु कृष्ण,मन्दिरों में घनघनाने लगी घन्टियाँ

फुलवारी शरीफ | रात बारह बजते ही घरो में और मदिरो में बजने लगी घंटिया और हर ओर हरे नारायण कृष्ण मुरारी का नन्द के घर आगमन हो गया | बच्चों को कृष्णा के रूप में लोगों ने पूजना शुर कर दिया | बच्चे की कृष्ण के रूप धरे अपने धुन में मग्न हो गये | झमाझम बारिश में जैसे पांच हजार साल पहले कृष्ण ने जन्म लिए थे वैसे ही बारिश के बीच कान्हा के जन्मोत्सव की खुशियाँ चारों दिशाएं मनाने लगी | आधी रात मानो आज ही कान्हा धरती पर अवतरित हुए और हर ओर मनोहारी सा दृश्य हो गया | हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे की ध्वनी गुंजायमान हो उठी | महिलाएं मानो यशोदा माता का रूप धरे अपने नन्हे मुन्हे को कृष्णा का अवतार मानकर पूजा करने लगी |
यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥

गीता की इस अवधारण द्वारा भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं कि जब जब धर्म का नाश होता है तब तब मैं स्वयं इस पृथ्वी पर अवतार लेता हूँ और अधर्म का नाश करके धर्म कि स्थापना करता हूँ।

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