बिहार के स्कूलों में टैब से हाजिरी व्यवस्था ठप, लाखों छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति प्रभावित

  • डेढ़ लाख से अधिक टैब वितरण के बावजूद अधिकांश स्कूलों में लागू नहीं हो सकी व्यवस्था
  • तकनीकी दिक्कतें और वास्तविक उपस्थिति में अंतर बने मुख्य कारण

पटना। बिहार सरकार द्वारा स्कूलों में पारदर्शिता लाने और उपस्थिति प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई टैब आधारित हाजिरी व्यवस्था अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। राज्य के 76 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों में डेढ़ लाख से ज्यादा टैब वितरित किए जाने के बावजूद करोड़ों विद्यार्थियों और लाखों शिक्षकों की उपस्थिति अभी भी पारंपरिक या वैकल्पिक माध्यमों से दर्ज की जा रही है। शिक्षा विभाग ने फरवरी माह से ही सभी विद्यालयों में टैब के माध्यम से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने का निर्देश जारी किया था। इसके बाद अप्रैल में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद अधिकांश स्कूलों में इस व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 76 हजार 116 प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में यह प्रणाली लागू की जानी थी। अब तक लगभग 75 हजार 640 विद्यालयों में एक लाख 55 हजार 417 टैब उपलब्ध कराए जा चुके हैं। प्रत्येक विद्यालय को सामान्यतः दो टैब दिए गए हैं, जबकि अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों को तीन टैब भी उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद टैब के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पाई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में कई प्रकार की चुनौतियां सामने आ रही हैं। पहला प्रमुख कारण यह बताया जा रहा है कि विद्यालयों में दर्ज की जा रही उपस्थिति और वास्तविक उपस्थिति में अंतर है। टैब आधारित प्रणाली में विद्यार्थियों और शिक्षकों की वास्तविक मौजूदगी आवश्यक होती है, जिससे पूर्व की तुलना में उपस्थिति दर्ज करने में सख्ती आई है। दूसरा महत्वपूर्ण कारण तकनीकी समस्याएं हैं। कई विद्यालयों में शिक्षकों को टैब संचालित करने में कठिनाई हो रही है। सभी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे तकनीकी सहायता का अभाव बना हुआ है। हालांकि, विभाग की ओर से प्रधान शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और चयनित नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर समस्याएं बनी हुई हैं। बताया जा रहा है कि पहले कुछ शिक्षक विद्यालय पहुंचे बिना ही मोबाइल के माध्यम से तस्वीर भेजकर अपनी उपस्थिति दर्ज कर लेते थे, लेकिन टैब आधारित प्रणाली में ऐसा संभव नहीं है। इस प्रणाली में विद्यालय परिसर में उपस्थित रहकर ही उपस्थिति दर्ज की जा सकती है, जिससे कई जगहों पर इसका विरोध भी देखा जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था को बिहार राज्य शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा एक एजेंसी के माध्यम से लागू किया गया है। टैब में सभी आवश्यक सुविधाएं दी गई हैं, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति सीधे ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज हो सके। इस प्रणाली में चेहरे की पहचान प्रणाली का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे उपस्थिति की सटीकता सुनिश्चित की जा सके। इसके तहत कक्षा शिक्षक को विद्यार्थियों की सामूहिक तस्वीर अपलोड करनी होती है, जबकि शिक्षकों के लिए अलग-अलग कोड निर्धारित किए गए हैं। उपस्थिति दर्ज होते ही यह जानकारी तुरंत पोर्टल पर उपलब्ध हो जाती है, जिससे निगरानी आसान हो जाती है। विभाग का मानना है कि इस प्रणाली से विद्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। विशेष रूप से तकनीकी प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाने पर जोर देना होगा। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की डिजिटल व्यवस्था को लागू करने से पहले जमीनी स्तर पर तैयारियों को मजबूत करना जरूरी होता है। शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे नई प्रणाली को आसानी से अपनाने में सक्षम हो सकें। फिलहाल, शिक्षा विभाग इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए प्रयासरत है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सभी विद्यालयों में टैब के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया जाएगा और जो विद्यालय इसका पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

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