महिला आयोग में सास ने लगाई गुहार, पारिवारिक विवाद में बहू पर गंभीर आरोप

  • अवैध संबंध और धमकी का आरोप, बेटे की मानसिक स्थिति बिगड़ने का दावा
  • आयोग ने बहू को भेजा समन, 8 मई को होगी अगली सुनवाई

पटना। बिहार राज्य महिला आयोग में एक पारिवारिक विवाद से जुड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक सास ने अपनी बहू के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। यह मामला पटना के बेऊर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। सास का आरोप है कि उसकी बहू के कथित अवैध संबंधों के कारण उसका बेटा मानसिक रूप से काफी परेशान हो गया है और पूरे परिवार का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बहू को समन जारी किया है और अगली सुनवाई की तारीख 8 मई तय की गई है।
विवाह के बाद सामने आया विवाद
आवेदिका के अनुसार, उसके बेटे की शादी वर्ष 2016 में पड़ोस की एक लड़की से आपसी सहमति के आधार पर मंदिर में हुई थी। शादी के शुरुआती दो वर्षों तक सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन इसके बाद एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया। सास का कहना है कि घर आए एक मेहमान के साथ बहू को आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया था। इस घटना के बाद परिवार में काफी तनाव पैदा हो गया था। हालांकि बाद में बहू ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसा व्यवहार न करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिवार ने मामला शांत कर दिया।
पति-पत्नी अलग रहने लगे
घटना के बाद पति ने अपनी पत्नी की बातों पर विश्वास करते हुए परिवार से अलग रहने का निर्णय लिया। दोनों अलग घर में रहने लगे और अपनी जिंदगी आगे बढ़ाने का प्रयास किया। सास का कहना है कि वर्ष 2024 में परिवार के समझाने पर बेटा अपनी पत्नी के साथ दोबारा घर वापस आ गया। इस दौरान बहू एक विद्यालय में शिक्षण कार्य करने लगी, जिससे परिवार को लगा कि अब स्थिति सामान्य हो जाएगी।
व्यवहार में बदलाव से बढ़ा संदेह
परिवार के अनुसार, कुछ समय बाद बहू के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। सास का कहना है कि बहू अक्सर घर की छत या स्नानघर में जाकर लंबे समय तक मोबाइल फोन पर बातचीत करती थी। इससे परिवार के सदस्यों को संदेह हुआ। एक दिन बेटे ने ध्यान से बातचीत सुनी तो उसे पता चला कि उसकी पत्नी किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत कर रही है।
मोबाइल संदेश से बढ़ा विवाद
सास का आरोप है कि बेटे ने जब अपनी पत्नी का मोबाइल फोन देखा तो उसमें कई आपत्तिजनक संदेश पाए गए। इन संदेशों से यह संकेत मिला कि बहू के दो अलग-अलग व्यक्तियों के साथ संबंध थे। संदेशों में अशोभनीय बातचीत भी बताई गई है। जब बेटे ने इस विषय पर शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने की कोशिश की, तो बहू ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने की धमकी दी।
झूठे मामले में फंसाने की धमकी का आरोप
आवेदिका का कहना है कि बहू ने यह कहा कि महिलाओं के पक्ष में कई कानून हैं और वह झूठा मामला दर्ज कराकर पूरे परिवार को जेल भिजवा सकती है। इस घटना के बाद बेटा मानसिक रूप से काफी परेशान हो गया। परिवार के अनुसार, वह तनाव के कारण बीमार रहने लगा है और उसका इलाज चल रहा है। सास का कहना है कि उसका बेटा अपनी छह वर्षीय बेटी के भविष्य को देखते हुए परिवार को टूटने से बचाना चाहता है और वह अपनी पत्नी से अलग नहीं होना चाहता।
परिवार को बचाने की कोशिश
सास का कहना है कि वह केवल अपने बेटे का घर बसते देखना चाहती है। उसका मानना है कि बाहरी लोगों के हस्तक्षेप के कारण ही परिवार में विवाद बढ़ा है। वह चाहती है कि इस मामले का समाधान इस प्रकार निकले जिससे परिवार में शांति बनी रहे और भविष्य सुरक्षित हो सके।
महिला आयोग ने जारी किया समन
बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्य शीला टुड्डू ने बताया कि आवेदिका ने अपने आवेदन के साथ मोबाइल संदेशों के चित्र साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए हैं। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बहू को कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए समन भेजा है। आयोग का कहना है कि दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा।
संतुलित समाधान की कोशिश
आयोग का मानना है कि पारिवारिक मामलों में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में केवल कानूनी पहलू ही नहीं, बल्कि पारिवारिक संबंधों और भविष्य को भी ध्यान में रखा जाता है। आयोग का प्रयास है कि दोनों पक्षों को सुनकर ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे न्याय के साथ-साथ परिवार भी सुरक्षित रह सके।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है। उस दिन दोनों पक्षों की उपस्थिति में पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल यह मामला पारिवारिक संबंधों में बढ़ते तनाव और आपसी विश्वास की कमी को दर्शाता है। इस घटना ने यह भी संकेत दिया है कि पारिवारिक विवादों को समय रहते बातचीत और समझदारी से सुलझाना आवश्यक है। यदि आपसी विश्वास कमजोर हो जाए तो संबंधों में तनाव बढ़ जाता है, जिसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। अब सभी की नजर आयोग की आगामी सुनवाई पर है, जहां इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

You may have missed