हवाईअड्डा सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती, देश में स्थापित होंगे उन्नत जांच केंद्र

  • बीसीएएस और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच समझौता, उपकरणों की होगी स्वदेशी जांच
  • विदेशी मानकों पर निर्भरता घटेगी, भारत बनेगा वैश्विक प्रमाणन केंद्र

नई दिल्ली। देश में हवाईअड्डों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ‘जांच केंद्र’ स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहां हवाईअड्डों पर उपयोग होने वाले सुरक्षा उपकरणों की जांच, मूल्यांकन और प्रमाणन किया जाएगा। इस दिशा में नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जो देश की विमानन सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इस समझौते के तहत एक अत्याधुनिक जांच केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां पूर्ण शरीर स्कैनर सहित अन्य सुरक्षा उपकरणों की व्यापक जांच की जाएगी। यहां उपकरणों की सुरक्षा, गुणवत्ता, शोध, प्रशिक्षण, मानक निर्माण और पारस्परिक अनुकूलता का कड़ा परीक्षण किया जाएगा। यह केंद्र मूल उपकरण निर्माता कंपनियों द्वारा बनाए गए उपकरणों की स्वतंत्र जांच और सत्यापन करेगा और इसके आधार पर विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की जाएगी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस पहल को सरकार के सुरक्षा अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और दक्षता निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य एक आत्मनिर्भर और आत्म-सुरक्षित भारत का निर्माण करना है, जहां सुरक्षा मानकों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो सके। मंत्री ने कहा कि अब भारत को केवल विदेशी प्रमाणन मानकों का पालन करने के बजाय स्वयं को विमानन सुरक्षा प्रमाणन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहिए। इस समझौते के माध्यम से मूल उपकरण निर्माताओं को अपने उत्पादों के परीक्षण और प्रमाणन की सुविधा देश में ही उपलब्ध हो सकेगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। साथ ही यह भारत को अपने स्वयं के सुरक्षा मानक विकसित करने में भी मदद करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो की नियामक क्षमता और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर एक स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगी, जो अमेरिका के परिवहन सुरक्षा प्रशासन और यूरोप के यूरोपीय नागरिक उड्डयन सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष होगा। इससे भारत वैश्विक स्तर पर विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप होंगी। यहां उपकरणों की गहन जांच के साथ-साथ एक मजबूत मान्यता ढांचा भी तैयार किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल मानकों पर खरे उतरने वाले उपकरण ही हवाईअड्डों पर लगाए जाएं। इस समझौते में शोध, शिक्षाविदों, प्रशिक्षण और कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कार्यशालाओं, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ज्ञान साझा करने की पहल के माध्यम से इस क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित की जाएगी। इससे न केवल सुरक्षा प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार होंगे। केंद्रीय मंत्री ने देश में तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2014 तक देश में केवल 74 हवाईअड्डे थे, जो अब बढ़कर 165 हो चुके हैं। वर्तमान में देश के हवाईअड्डों पर हर घंटे सैकड़ों उड़ानों का संचालन हो रहा है और हजारों यात्री यात्रा कर रहे हैं। इसके अलावा वायु माल परिवहन में भी पिछले एक दशक में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में उच्च स्तर की तकनीक और पेशेवर दक्षता को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच हुआ यह समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो देश को भविष्य के लिए सुरक्षित और सक्षम विमानन प्रणाली प्रदान करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत विमानन सुरक्षा उपकरणों के परीक्षण और प्रमाणन का वैश्विक केंद्र बने। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान भी सुदृढ़ होगी।

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