February 11, 2026

12 घंटे कार्यदिवस के खिलाफ ऐक्टू के राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद के दूसरे दिन भी माले ने किया प्रदर्शन

फुलवारी शरीफ। आल इंडिया सेंट्रल कॉन्सिल आफ ट्रेड यूनियन्स ऐक्टू के द्वारा लॉकडाउन के बहाने कॉरपोरेटों के हित में श्रम कानूनों को निलंबित और कमजोर किए जाने के खिलाफ आयोजित अखिल भारतीय प्रतिवाद के दूसरे दिन भी भाकपा-माले कार्यकर्ताओं ने भी अपनी भागीदारी निभाई। चितकोहरा में माले की केंद्रीय कमिटी की सदस्य और आशा कार्यकर्ताओं की नेता शशि यादव, टेंपो यूनियन के नेता मुर्तजा अली, माले नेता जितेंद्र कुमार आदि के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर आइसा के बिहार राज्य सह सचिव आकाश कश्यप उपस्थित थे। इस मौके पर शशि यादव ने कहा कि कल प्रधानमंत्री ने देश की जनता और मजदूरों के साथ छलावा ही किया। कहते हैं कि देश को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन दूसरी ओर मजदूरों के लिए कार्यदिवस 12 घंटे कर दिए गये और उन्हें गुलाम बनाने की साजिश रची जा रही है। कोरोना के नाम पर देश को आत्मनिर्भर तो नहीं, मजदूरों को गुलाम बनाया जा रहा है। खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा है कि अगर देश के मजदूरों को गुजारा भत्ता नही दिया जाता, लॉक डाउन अवधि की मजदूरी नहीं मिलती और छह महीने का राशन का इंतजाम नहीं होता, तो यही समझा जाएगा कि यह पैकेज नहीं, मात्र छलावा है।
रसोईया संघ की नेता सरोज चौबे ने कहा कि यह श्रम अधिकारों का निलंबन नहीं है, बल्कि कॉरपोरेटों के दवाब में विभिन्न राज्य की सरकारें लंबी लड़ाई के बाद हासिल मजदूरों के अधिकार को एकदम से खत्म करके उन्हें गुलाम बनाने की दिशा में बढ़ रही है। मजदूरों को ये अधिकार हमारे देश का संविधान देता है, लेकिन उसकी लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 12 घंटे कार्यदिवस एकदम से अमानवीय कार्रवाई है, इसे वापस लेना होगा।

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