गोपालगंज में 80 करोड़ की बड़ी ठगी, निवेश दोगुना करने के नाम पर 256 लोग बने शिकार

  • ‘आस्था’ कंपनी के संचालक कार्यालय बंद कर फरार, निवेशकों में हड़कंप
  • पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की, बैंक खातों और लोकेशन की पड़ताल जारी

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले से एक बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें ‘आस्था’ नामक एक निजी कंपनी के संचालकों पर करीब 80 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि कंपनी ने निवेश की राशि को कम समय में दोगुना करने का लालच देकर लगभग 256 लोगों से बड़ी रकम जमा करवाई और बाद में कार्यालय बंद कर फरार हो गई। इस घटना के सामने आने के बाद निवेशकों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। मिली जानकारी के अनुसार, यह ठगी वर्ष 2023 से शुरू हुई थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में भव्य बैठक आयोजित कर स्थानीय लोगों को आकर्षक निवेश योजनाओं के बारे में जानकारी दी थी। कंपनी ने दावा किया था कि जो भी व्यक्ति उनके पास धन जमा करेगा, उसे 20 महीने के भीतर उसकी राशि का दोगुना लाभ मिलेगा। इस लुभावने प्रस्ताव से प्रभावित होकर मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों ने अपनी मेहनत की कमाई कंपनी में निवेश कर दी। पीड़ितों के अनुसार, शुरुआत में कंपनी की ओर से विश्वास दिलाने के लिए नियमित संपर्क बनाए रखा गया और निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि उनका पैसा सुरक्षित है। इसी विश्वास के कारण लोगों ने अपनी बचत, जमीन बेचकर प्राप्त राशि और उधार लेकर भी निवेश किया। लेकिन अचानक स्थिति तब बदली जब लगभग एक सप्ताह पहले कंपनी के गोपालगंज और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित कार्यालयों पर ताला लटक गया। जब निवेशक अपने पैसे की जानकारी लेने कार्यालय पहुंचे, तो वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। कार्यालय पूरी तरह बंद था और आसपास सन्नाटा पसरा हुआ था। कंपनी के प्रबंधक और कर्मचारी अपने मोबाइल फोन बंद कर चुके थे और उनका कोई पता नहीं चल रहा था। इसके बाद पीड़ितों को एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं। बड़ी संख्या में पीड़ित निवेशकों ने पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। पीड़ितों में सुदामा कुशवाहा, हरेंद्र राय, राजन कुमार, सागर गुप्ता, दिलीप शर्मा, आलोक कुमार बरनवाल और अजय कुमार सहित कई लोग शामिल थे। उन्होंने बताया कि करीब 256 लोगों की जीवन भर की कमाई इस कंपनी में फंसी हुई है। नगर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रभाकर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने ठगी के इस बड़े मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह टीम कंपनी के बैंक खातों की जांच करेगी और फरार आरोपियों की लोकेशन का पता लगाने का प्रयास करेगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी और निवेशकों की रकम की बरामदगी के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि कंपनी ने किन-किन माध्यमों से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया और क्या इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता है। इस घटना ने क्षेत्र में निवेश योजनाओं को लेकर लोगों के बीच अविश्वास पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की योजनाओं में निवेश करने से पहले उनकी वैधता की जांच करना अत्यंत आवश्यक है। उच्च लाभ का लालच अक्सर लोगों को जोखिम में डाल देता है। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित कंपनी की प्रमाणिकता और सरकारी पंजीकरण की जानकारी अवश्य लें। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देने की भी सलाह दी गई है। फिलहाल, इस मामले की जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पीड़ित निवेशकों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाई जा सकेगी।

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