January 1, 2026

कोरोना पर सीएम नीतीश ने पीएम मोदी को दी विस्तृत जानकारी, कहा- जब तक नियमों में संशोधन नहीं होगा….

पटना। कोरोना वायरस को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की और विभिन्न प्रदेशों का हाल जाना। पीएम मोदी के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने में केंद्र, राज्य सरकार और आम जनता के सामूहिक प्रयास की सराहना की और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए किये जा रहे कार्यों तथा भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोरोना पर विस्तृत जानकारी देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कहा कि बिहार में 14 अप्रैल के पहले कोरोना संक्रमण के 66 पॉजिटिव मामले थे और आज तक 290 मामले हो चुके हैं। शुरूआत में विदेश से आये लोगों के कारण राज्य में कुछ कोरोना संक्रमण के मामले आये, उनकी जांच की गयी और उनका इलाज भी कराया गया। अब तक कोरोना संक्रमित 56 मरीज स्वस्थ्य होकर घर भी लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के 22 जिलों के 48 प्रखंडों में कोरोना से संक्रमित मामले सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना की जांच के लिए छह लैब काम कर रहे हैं, जहां जांच में तेजी आयी है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए पूरे राज्य में पल्स-पोलियो अभियान की तर्ज पर डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग करा रहे हैं। अब तक 75 लाख परिवारों के 4 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। पूरे बिहार में एक-एक घर की जांच का निर्णय हमलोगों ने लिया है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राजस्थान के कोटा के कोचिंग संस्थानों में बिहार के छात्र बड़ी संख्या में पढ़ते हैं। कुछ राज्य अपने छात्रों को वहां से वापस बुलाये हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से कोटा के छात्रों के संबंध में कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के गाईड लाइन के अनुरूप हमलोग लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। जब तक नियमों में संशोधन नहीं होगा, तब तक किसी को भी वापस बुलाना संभव नहीं है। केंद्र सरकार इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करे। कोटा ही नहीं देश के अन्य हिस्सों में भी बिहार के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में बिहार के लोग जो बाहर फंसे हैं, उन्होंने फोन के माध्यम से बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय में समस्याएं बतायीं। अब तक ऐसे एक लाख से अधिक फोन कॉल एवं मैसेज आ चुके हैं। ऐसे लोगों से फीडबैक लेकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम किये जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य के बाहर फंसे बिहारी मजदूरों एवं जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए सहायता राशि के रूप में मुख्यमंत्री विशेष सहायता अंतर्गत 1,000 रुपये देने का निर्णय किया। इस संबंध में अब तक 25 लाख आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 15 लाख लोगों के खाते में 1000 रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए एकजुट होकर अच्छा काम कर रहा है। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप तो काम किये ही जा रहे हैं, साथ ही कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हमलोग भी अपने स्तर से राज्य में अतिरिक्त कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की गाइडलाइन के अनुरूप कुछ आर्थिक गतिविधियों के संचालन के लिए अनुमति दी गयी है, उसके अनुरूप राज्य में कुछ कार्य शुरू किये गये हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य किये जा रहे हैं। मनरेगा के माध्यम से भी कार्य कराये जा रहे हैं। जल संसाधन विभाग के माध्यम से बाढ़ निरोधक कार्य कराये जा रहे हैं। मजदूर वर्ग के लोगों एवं जरूरतमंदों के जीविाकोपार्जन के लिए जो जरूरी आर्थिक गतिविधियां हैं, उसे संचालित कराया जा रहा है। लॉकडाउन की वजह से लोग घरों में थे, इस कारण संभवत: क्षति कम हुई है. लॉकडाउन के कारण ना सिर्फ कोरोना संक्रमण बल्कि अन्य बीमारियों को भी रोकने में मदद मिली है। लोगों को राहत दिलाने के लिए हमसब हमेशा तत्पर रहते हैं।

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