Thu. Jun 27th, 2019

एम्स के सर्जन अनिल कुमार ने सजर्री की दुनिया में कर दिया कमाल, पढ़ें पूरी खबर

एक गाॅलब्लाडर स्टोन का आपेरशन करने मे लगा औसत 12से 13 मिनट
6 घंटे में कुल 21 लोगो का हुआ गाॅलब्लाडर स्टोन का सफल आपरेशन 

फुलवारीशरीफ । पटना एम्स के ट्राॅमा एंड इमरजेंसी के हेड और प्रख्यात सर्जन डा अनिल कुमार ने औसत 12से 13 मिनट में एक गाॅलब्लाडर स्टोन का आपेरशन करके सर्जरी दुनिया में हलचल मचा दीं । 6 घंटे में कुल 21 लोगों का गाॅलब्लाडर स्टोन का सफल आपरेशन करके एक उदाहरण कायम किया है। सभी मरीज स्वस्थ है। सर्जन डा अनिल कुमार ने आपरेशन करने के बाद बताया कि सरकारी अस्पतालों मे बुनियादी ठांचों में 1टू 6 नियम लागू किया जाये तो अधिक से अधिक गाॅलब्लाडर का आॅपरेशन किया जा सकता है। डा अनिल के रिर्सच में यह नियम 1 टू 6 नियम में कहा गया है कि लेप्रोस्कोपिक काॅली सिस्टेक्टोमी से आॅपरेशन किया जाये तो छह घंटे में 21 से 25 आपरेशन किया जा सकता है। डा अनिल ने 1 टू 6 का विस्तृत जानकारी देते हुये बताया कि 1 सर्जन , 2 टेबुल , 3 असिस्टेंट एसआर , जेआर , 4 बेहोशी के डाक्टर , 5 सपोटिंग स्टाफ और 6 घंटे है। डा अनिल ने बताया कि अगर सभी सर्जन इस नियम का पालन करे तो गाॅलब्लाडर में स्टोन के मरीज अधिक से अधिक कम समय पर सफल आपरेशन किया जा सकता है। एक अनुसंधान के अनुसार पुरी दुनिय मे सबसे कम 35 मिनट मे एक गाॅलब्लाडर का आॅपेरशन किया गया है जो विश्व रिकार्ड है। पटना एम्स मे औसत 12 से 13मिनट मे एक गाॅलब्लाडर स्टो्रन का आपरेशन मे समय लगा। इस के अलोक मे कहा जा सकता है कि विश्व रिकार्ड बनाने के लिए एक कदम आगे बढा है। 21 मे से एक मरीज को 40मिनट तक आॅपरेशन करने मे समय लगा । एक मरीज को ड्रेन लगया गया ।गुरूवार को सभी मरीजों का डिस्चार्ज कर दिया जायेगा।

इन मरीजो का हुआ आपरेशन
डा अनिल ने बताया कि 21 मरीजों में 20 मरीज महिलाएं थी और एक पुरूष थे । गाॅलब्लाडर मे स्टोन की बिमारी महिलाओ मे अधिक पायी जाती है ।भारत मे बिहार में गाॅलब्लाडर मे स्टोन की बिमारी अधिक है जो खास कर गंगा के तराई इलाको मे रहने वाले लोगो मे मिला रहा है। प्रिया देवी , संजू माला, डोली कुमारी , ममता देवी , प्रतीमा देवी ,सविता देवी ,शोभा देवी , मधु चैधरी ,बिंदु देवी ,निधि प्रसाद , शारदा , खुशबु कुमारी , अमिताभ रंजन , राधिका देवी ,विभा कुमारी , सरस्वती देवी , हेना कौसर , मनोसरी देवी , निभा देवी एंव निभा कुमारी है।

डाक्टरों की टीम यह है
सर्जन अनिल कुमार , बेहोशी के डाक्टर डा. शगुफता नाज, डा. अभिउदय , डा. रवि कुमार , डा. शिव कुमार , डा. दीपक और डा. अमलपुष्प थे।

क्या है 1 टू 6 नियम

एक विशेषज्ञ सर्जन, 2 ऑपरेशन टेबल , तीन असिस्टेंट , चार एनेस्थेटिक, पांच सपोर्टिंग स्टाफ ( जिसमे नर्से भी शामिल )और छह घंटे की सर्जरी अगर हो तो बीस से पच्चीस गॉल ब्लॉडर के मरीजो का ऑपरेशन एक दिन में किया जा सकता है । इससे सरकार के संसाधनों का सही मायने के उपयोग किया जा सकता है। इस सिस्टम से ऑपरेशन में अधिक से अधिक लोगो का भला हो सकता है। गॉल ब्लाडर के पत्थर निकालने की ऑपरेशन पद्धति को लैप्रोस्कोपिक कोली सिसटेक्टोमी कहा जाता है।

डा. अनिल की टीम को बधाई दी

एम्म्स निदेशक समेत हर विभाग के डाक्टरों ने डा. अनिल की टीम को बधाई दी । बधाई देने वालो मे निदेशक डा पी के सिंह,एमएस डा सीएम सिहं , डा. प्रेम कुमार , डा. संजीव कुमार , डा. सुदीप कुमार , डा. अनुप कुमार , डा. क्रांति भावना , डा. सूर्य विक्रम , डा. प्रशांत कुमार ,डा अमरजीत कुमार , डा. अजीत कुमार, डा. मुक्ता अग्रवाल , डा मोनिका आनंत , डा. रवि किर्ती , डा. देवेन्दु भूषण समेेत अन्य चिकित्सको के नाम उल्लेखनीय है।